इस बार नहीं

इस बार नहीं
इस बार नहीं जब वो छोटी सी बच्ची मेरे पास अपनी खरोंच लेकर आयेगी
मैं उसे फूं-फूं कर नहीं बहलाऊँगा
पनपने दूंगा उसकी टीस को
इस बार नहीं
इस बार जब मैं चेहरो पर दर्द लिखा देखूंगा
नहीं गाऊँगा गीत पीड़ा भुला देने वाले
दर्द को रिसने दूगा , ऊतरने दूँगा अन्दर गहरे
इस बार नहीं
इस बार मैं ना मरहम लगाऊँगा
ना ही ऊठाऊँगा रूई के फोहे
और ना ही कहूँगा कि तुम आँखे बन्द कर लो
गर्दन ऊधर करलो मैं दवा लगा देता हूँ
देखने दूँगा सबको हम सबको खुले नंगे घाव
इस बार नहीं
इस बार जब ऊलझनें देखूँगा छटपटाते देखूँगा नहीं दौड़ूँगा ऊलझी डोर लपेटने
ऊलझनें दूँगा जब तक ऊलझ सके
इस बार नहीं
इस बार कर्म का हवाला देकर नहीं ऊठाऊँगा औजार
नहीं करूँगा फिर से एक नई शुरूआत
नहीं बनूँगा एक मिसाल एक कर्मयोगी की
नहीं आने दूँगा जिन्दगी को आसानी से पटरी पर
ऊतरने दूँगा उसे किचड़ में, टेढे मेढे रास्तों पे
नहीं सूखने दूँगा दिवारों पर लगा खून
हल्का नहीं पड़ने दूँगा उसका रंग
इस बार नहीं बनने दूँगा उसे इतना लाचार
कि पान की पीक और खून का फर्क ही खत्म हो जाए
इस बार नहीं
इस बार घावों को देखना है
गौर से
थोड़ा लम्बे वक्त तक
कुछ फैसले
और उसके बाद हौंसले
कहीं तो शुरूआत करनी ही होगी
इस बार यही तय किया है
- प्रसून जोशी



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कब खत्म होगा ये अंधविश्वास

जब मैं अंधविश्वास से भरे ऐसे समाचार पढ़ता हूँ तो लगता है ना जाने हम कौन से युग मैं रहते हैं|
राजकोट. ग्यारह माह के एक मासूम को अंधविश्वास के कारण दागे जाने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। विशाल नामक यह बालक एक सप्ताह से अंडकोषों की सूजन से पीड़ित था।

घर आए एक साधु ने उसके माता-पिता को बच्चे को दागने की सलाह थी। इसके बाद उसने लौंग गर्म कर मासूम के अंडकोशों को दाग दिया था। स्थानीय पुलिस मामले की जांच कर रही है।
इस प्रकार की घटना निंदनीय है|

थोड़ा रंग मंच

वैसे तो हमारा यह जीवन किसी रंग मंच से कम नहीं| हम निरंतर अपने जीवन काल में अभिनय ही करते रहतें हैं|

रंग मंच से मुझे शुरू से ही लगाव रहा है परन्तु सिर्फ एक दर्शक की हैसियत से|

डॉक्टर और मरीज़ अतिलघु नाटिका एक छोटा सा प्रयास उस दीर्घा को लांघने का| आपका आंकलन आपेक्षित है|


मुझे शिकायत है


मुझे शिकायत है उन हिंदी लेखकों से जो अपने सामान्य लेखन में हिंगलिश [ हिंदी + इंग्लिश (अंग्रेजी)] भाषा का उपयोग करतें हैं| यदि यह आप की शैली है अथवा आप किसी संवाद को उल्लेखित कर रहे है तो ठीक है वरन यह अत्यंत आपत्तिजनक है | यह हिंदी भाषा को गंभीरता से न लेते हुए उसके अपमान सा लगता है |

यह सत्य है की हिंदी भाषा का प्रयोग कुछ कठिन अवश्य है और इसका टंकण भी कुछ आसान नहीं| मेरे जैसे पाठकों के लिए हिंदी लेखों का पाठन अत्यंत रुचिकर होता है परन्तु बीच बीच में उदृत अंग्रेजी भाषा का प्रयोग (फॉरएग्जाम्पल, आई मीन, व्हाट, हाईपर्टेन्शन) उसे अपनी मिटटी से जोड़े रखने में अक्षम कर देता है|

बातचीत करते समय तो यह शैली हमारे रोम रोम में समा चुकी है, उम्मीद करता हूँ लेखन में हम इसे कुछ कम कर पाने में सफल होंगे|

एक छोटी सी भूल

सभी दिनों की तरह कल शाम ऑफिस से घर लौटते समय घर जल्दी पहुँचने की ललक में कलरव क्रूजित सड़क पर गाड़ियों की भीड़ को चीरते हुए अपने दुपहिया पर ज्यों ही मैं आगे बढ़ता जा रहा था | यकायक मैंने पाया के एक लाल रंग की कार शायद मेरे आगे निकलने से विचलित हो उठी है और ध्वनी प्रदुषण फैलाते हुए फिर से आगे बढ़ने के लिए प्रयतनशील हो उठी, पर तंग पहाड़ी रास्तों में से होते हुए जब दुपहिया हवा से बातें करने लगे तो भला किसी दुसरे बड़े वाहन की क्या मजाल...

पर इस लाल कार की कुछ और ही बात थी शायद इसका चालक घुटने टेकने को तैयार नहीं था| काफी आँख मिचौली खेलने के बाद अंततः मैंने इसे आगे निकल जाने देने का निश्चय कर लिया और ज्यों ही एक खुली जगह पर मैं बिलकुल सड़क के एक छोर से कच्चे रास्ते पर उतर गया| आगे निकलती हार्न बजाती लाल कार ज्यों ही आगे निकली उसमे से एक लहराता हुआ हाथ ऊपर उठा मानो अपनी विजय का जश्न मना रहा हो| पर यह क्या! विजयी चालक सामने से अत्यंत वेग से आती वैसी ही दूसरी कार की दिशा का सही सही अनुमान नहीं लगा पाया, और दोनों गाड़ियों के कोने धड़ाम से एक दुसरे से जा टकराए|

उत्सुकतापूर्वक मैंने अपना मोटरसाईकिल सड़क के किनारे खडा कर दिया दोनों गाडियां भी अपनी अपनी दिशा में जा खड़ी हुई| दुसरा झटका यह था के लाल कर में से जो सज्जन बाहर निकले वो और कोई नहीं अपना लंगोटिया यार अमित शर्मा था, जिसे मैं पिछले लगभग एक साल से ज्यादा समय से नहीं मिला हूँ |

पूरी कहानी समझ में आते मुझे देर न लगी, मेरा मित्र मेरा ध्यान अपनी ओर आकृष्ट करने की पुरजोर कोशिश कर रहा था और ज़रा सा ध्यान बंटने की वजह से दुर्घटना का शिकार होते होते बाल बाल बचा था | खुशी थी की किसी को कोई चोट नहीं लगी परन्तु वाहनों का मामूली नुक्सान हुआ था | दुसरे वाहन को मुआवजे के रूप में लगभग पंद्रह हज़ार रुपये देने पड़े और कुछ इतना ही नुक्सान अपने वाहन का उठाना पड़ा|

शायद सड़क पर की हुई यह कोई नक्षत्रिय चाल थी यह कह कर मैंने अपने घबराए मित्र को ढादास बंधाने की कोशिश की |

सूर्यग्रहण - देखें मगर आंख संभाल कर

क्या आपने सूर्यग्रहण देखने की तैयारी कर ली है?

पूरा देश बुधवार को पौ-फटते ही एक खास खगोलीय घटना में इक्कीसवीं सदी का सबसे लंबी अवधि का खग्रास (पूर्ण) सूर्यग्रहण देखेगा। राजस्थान में सूर्योदय से ही आंशिक ग्रहण नजर आएगा, जो सुबह 6.24 बजे मध्य काल को छुएगा।

नासा के मुताबिक 22 जुलाई को होने वाला सूर्यग्रहण पूर्ण सूर्यग्रहण होगा। चंद्रमा की छाया सूर्य को भारत से ढकना शुरू करेगी और यह नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार, चीन से गुजरते हुए पसिफिक ओशन में खत्म होगा। इसकी शुरुआत सुबह 5:30 बजे से होगी जो ज्यादातर इलाकों में 7:30 बजे तक रहेगा। पूर्ण सूर्यग्रहण 6.26 से 6.30 तक, करीब चार मिनट दिखेगा। इस दौरान सूर्य बिल्कुल भी नहीं दिखाई देगा।

पौराणिक और वैज्ञानिक मान्‍यताओं के अनुसार सूर्यग्रहण को सीधे हानिकारक है। पढ़े-लिखे होने में और शिक्षित होने में पीतल और सोने जैसा फर्क होता है। निजी समाचार चैनलों का अधिकांशतः समय ज्योतिषियों के साथ भाग्य बताने या केवल सूर्य ग्रहण का वीडियो दिखाने में अपना अधिकांश समय खर्च किया न के नयी पीढ़ी को उसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण को समझाने में। सूर्ख्‍ ग्रहण के सम्‍बन्‍ध में काफी भ्रान्तियाँ है। किन्‍तु आज के दौर में उन भ्रन्तियों को नजर अंदाज किया जा रहा है।
सूर्यग्रहण एक कुदरती जादू है, इंसानी सभ्यता की शुरुआत से आज तक हम सूर्यग्रहण को अलग-अलग नजरियों से देखते आए हैं और 22 जुलाई का दिवस भी ऐसा ही एक मौका है। इंसान ने अपने हुनर से काफी चीज़ों को पर नियंत्रण पाने में सफलता पाई है, या कम से कम उसे ऐसा लगता है। इसलिए जब-जब कोई ऐसी कुदरती घटना घटती है जो इंसान को उसकी तुच्छता का अहसास कराती तो उसकी हैरानी छिपाए नहीं छिपती। तमाम अंधविश्वासों और वैज्ञानिक स्पष्टीकरणों के बीच यह एक त्योहार जैसा है।
जहां दिल्ली से भी कई लोग सूर्यग्रहण देखने उन इलाकों में जाने की योजना बना रहे हैं वहीं विदेशी पर्यटक भी इसके लिए खिंचे चले आए हैं। कई ट्रैवल एजंसियों ने खास इसके नाम पर पैकेज तैयार किए हैं। कुछ लोगों ने तो एक साल पहले से इसकी तैयारी कर ली थी। मॉनसून को देखते हुए यह भी आशंका जताई जा रही है कि कहीं बादल सूर्यग्रहण देखने का मजा खराब न कर दें। लेकिन कुछ लोग मौसम को मात देते हुए बादलों के पार जाकर हवाई जहाज से इसे देखने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए कॉक्स ऐंड किंग्स ने हिस्टॉरिक इक्लिप्स फ्लाइट की तैयारी की है। चार्टर्ड फ्लाइट में बादलों के ऊपर जाकर सूर्यग्रहण देखा जा सकेगा। यह तीन घंटे की उड़ान होगी।

इसके बाद पूर्ण सूर्यग्रहण देखने का अगला मौका 25 साल बाद ही मिलेगा। 6 मिनट 39 सेकंड लंबा पूर्ण सूर्यग्रहण फिर 13 जून 2132 तक नहीं दिखाई देगा। 22 जुलाई को भारत के कई हिस्सों में पूर्ण सूर्यग्रहण दिखाई देगा। सेंचुरी के सबसे लंबे पूर्ण सूर्यग्रहण को देखने के लिए लोगों में जबर्दस्त उत्साह है। जिन जगहों में पूर्ण सूर्यग्रहण दिखने वाला है वहां भारत से ही नहीं बल्कि अमेरिका, ब्रिटेन से भी सैलानी आ रहे हैं।

- आंशिक सूर्यग्रहण या आंशिक तौर पर पूर्ण सूर्यग्रहण या बादलों से ढके सूर्यग्रहण को बिना सही उपकरणों के देखना कभी सुरक्षित नहीं होता है। यहां तक कि सूर्य निन्यानवे प्रतिशत भी अगर चंद्रमा से ढका हो तब भी नहीं। क्योंकि तब भी सूर्य का दिख रहा एक प्रतिशत इतना तीव्र होता है कि रेटिना को नुकसान पहुंचा सकता है।

- नंगी आंखों से सूर्यग्रहण देखना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

- आंशिक सूर्यग्रहण और बादल लगे होने पर भी नंगी आंखों ने देखना खतरनाक है।

- सौर्य विकिरण से आँखों पर असर पड़ सकता है। इससे देखने की क्षमता कुछ समय के लिए या हमेशा के लिए जा सकती है।

- खास तरह के फिल्टर लेंस से ही सूर्यग्रहण देखना चाहिए।

- किसी छोटे छेद से किसी पर्दे पर सूर्य की इमेज बनाकर प्रोजेक्शन के जरिए उसे देखा जा सकता है।

- पानी या आइने में सूर्यग्रहण को देखना भी उतना ही खतरनाक होता है जितना कि सीधे देखना।